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क्या ज्यादा व्हे प्रोटीन लिवर और किडनी खराब कर देता है

बॉडी बिल्डिंग में इस्तेमाल होने वाले सबसे पॉपुलर सप्लीमेंट्स में एक है व्हे प्रोटीन। तमाम तरह के फायदों के बावजूद इसके इस्तेमाल को लेकर कुछ आपत्तियां और शंकाएं भी हैं। कुछ रिसर्च कहती हैं कि बहुत ज्यादा व्हे प्रोटीन लीवर और किडनी को डैमेज कर सकता है और यहां तक कि ओस्टियोपोरोसिस की बीमारी की वजह बन सकता है।

आज हम व्हे प्रोटीन को लेकर की गई कुछ रिसर्च के बारे में बात करेंगे। ये रिसर्च प्रोटीन के यूज, ओवरयूज और साइड इफेक्ट को लेकर की गई हैं। व्हे प्रोटीन को लेकर अक्सर मन में ये सवाल उठते हैं –

  • क्या है व्हे प्रोटीन
  • व्हे प्रोटीन के लाभ
  • क्या व्हे प्रोटीन से पेट खराब होता है
  • क्या इससे लिवर खराब हो सकता है
  • क्या इससे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हो सकता है
  • हमें कितना व्हे प्रोटीन लेना चाहिए

क्या है व्हे प्रोटीन

व्हे प्रोटीन एक बेहद पॉपलुर फिटनेस सप्लीमेंट है, बॉडी बिल्डिंग में सबसे ऊपर इसी का नाम आता है। किसी भी बॉडी बिल्डर की डाइट का अहम हिस्सा है। ये व्हे से बनता है। जब हम दूध से चीज़ बनाते हैं तो उस प्रोसेस के दौरान पीले से रंग का पानी निकलता है। इसी पानी को सुखाकर व्हे प्रोटीन बनाया जाता है।

खोजने वाले ने भी क्या चीज खोजी है, इस पानी को पहले फेंक दिया जाता था, मगर अब देखो ये कितना कीमती साबित हो गया। मैंने आपको केवल समझाने के लिए मोटे मोटे शब्दों में बताया है। इस पानी से जो पाउडर बनता है उससे सबसे पहले मिलता है नॉर्मल व्हे प्रोटीन या जिसे हम कह सकते हैं व्हे प्रोटीन ब्लेंड।

इसके बाद इसे और प्रोसेस करते हैं और फैट निकालते हैं तो बनता है व्हे प्रोटीन कॉन्संट्रेट (Whey protein concentrate)। कॉन्संट्रेट में 70 से 80% प्रोटीन होता है। इसे एक बार फिर प्रोसेस करते हैं और पूरी तरह फैट निकाल देते हैं तो बनता है व्हे प्रोटीन आइसोलेट (Whey protein isolate)। इसमें 90% परसेंट प्रोटीन होता है। इसीलिए आइसोलेट सबसे महंगा होता है और ब्लेंड सबसे सस्ता। (रिसर्च 1)

व्हे प्रोटीन के लाभ

रिसर्च बताती हैं कि व्हे प्रोटीन एक्सरसाइज करने के बाद रिकवर करने में मदद करता है। ये वजन घटाने और वजन बढ़ाने दोनों में कारगर है। इसे इस्तेमाल करने के तरीके और बाकी की डाइट पर डिपेंड करता है कि आप कैसे इसकी मदद से वेट लूज कर सकते हैं और कैसे इसकी मदद से वेट गेन कर सकते हैं। (रिसर्च 2) 

व्हे प्रोटीन, प्रोटीन का कंप्लीट सोर्स होता है। इसका मतलब ये है के इसमें सभी तरह के जरूरी अमीनो एसिड होते हैं। हमारा शरीर सभी तरह के अमीनो एसिड नहीं बना सकता इसलिए ये जरूरी है कि हम डाइट से इन्हें पूरा करें। शाकाहारी डाइट में एक छोटी सी कमी ये होती है कि कुछ जरूरी अमीनो एसिड इतनी आसानी से नहीं मिल पाते।

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आप पानी, दूध या जूस या छाछ जैसे चाहें वैसे व्हे प्रोटीन का यूज कर सकते हैं। हां ये बात सही है कि इसके फायदों की एक पूरी फेहरिस्त है मगर बहुत से लोगों के मन में इसे लेकर शंकाएं होती हैं।

क्या व्हे प्रोटीन से पेट खराब होता है

जिन लोगों ने व्हे प्रोटीन का यूज करने के बाद साइड इफेक्ट या परेशानियां सामने आने की बात की कही है उनमें से ज्यादातर को पेट से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। कुछ लोगों को इसे पचाने में दिक्कत होती है। उनका पेट फूल जाता है, गैस होती होती है, पेट में दर्द होने लगता है और डायरिया हो जाता है।

मगर देखा जाए तो ये ज्यादातर साइड इफेक्ट लेक्टोस इंटॉलरेंस (रिसर्च 3) की वजह से होते हैं। दूध में यही वो चीज होती है, जिसकी वजह से कई लोगों को दूध हजम नहीं होता। व्हे प्रोटीन में जो कार्ब होता है वो बेसिकल लेक्टोस ही होता है। लैक्टोस को पचाने के लिए हमारी बॉडभ् को एक इंजाइम पैदा करना होता है – लेक्टेस। जिन लोगों की बॉडी ये इंजाइम वाजिब मात्रा में पैदा नहीं कर पाती वो दूध या दूध से बनी चीजें हजम नहीं कर पाते हैं।

काबिलेगौर बात ये है कि दुनिया के 75% लोगों को लेक्टोस से जुड़ी दिक्कत है। अगर आपको भी ये दिक्कत है तो बेहतर होगा आप व्हे प्रोटीन आइसोलेट यूज करें, क्योंकि आइसोलेट में लेक्टोस कार्ब बहुत कम होता है। इतने से भी बात न बने तो आप सोया, मटर, अंडे अथवा चावल से बना प्रोटीन पाउडर ट्राई कर सकते हैं। इसे प्लांट प्रोटीन कहते हैं।

कुछ लोगों को व्हे प्रोटीन से एलर्जी होती है

कुछ लोगों को गाय का दूध पीने से दिक्कत होती है। व्हे प्रोटीन में गाय के दूध का इस्तेमाल होता है तो ऐसे में उन लोगों को परेशानी होना लाजमी है, जिन्हें गाय के दूध से एलर्जी है।

यहां एक बात और है कि बड़ों में गाय के दूध से एलर्जी के मामले कम होते हैं। 90% लोगों में उम्र बढ़ने के साथ गाय के दूध से जुड़ी दिक्कतें अपने आप खत्म हो जाती हैं। हां इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिन लोगों को गाय के दूध से भयंकर किस्म की एलर्जी है  उन्हें व्हे प्रोटीन से दूर रहना चाहिए, क्योंकि उनकी बॉडी बहुत गलत ढंग से रिएक्ट कर सकती है। (रिसर्च 4) 

एलर्जी और लेक्टोस इंटॉलरेंस में फर्क समझने की कोशिश करें। लेक्टोस इंटॉलरेंस है तो आपका पेट चलेगा। लेकिन अगर एलर्जी है तो बॉडी पर लाल निशान, चेहरे पर सूजन, गले और जीभ में सूजन आ सकती है इसके अलावा नाक बहना और नाक बंद होना भी एलर्जी के लक्षण हैं।

क्या इससे लिवर खराब हो सकता है

अभी तक ऐसा कोई पुख्ता सबूत तो सामने नहीं आया है कि व्हे प्रोटीन यूज करने से किसी स्वस्थ शख्स का लीवर डैमेज हो सकता है। सच तो ये है कि लिवर को भी अपनी मरम्मत करने के लिए प्रोटीन की जरूरत पड़ती है। हाल ही में 11 बेहद मोटे लोगों को लेकर एक रिसर्च की गई। (रिसर्च 5) 

इसमें हर दिन 60 ग्राम व्हे प्रोटीन इन लोगों को दिया गया। नतीजा ये रहा कि सभी ने करीब एक महीने में करीब 21% लिवर फैट कम कर लिया। इसके अलाव इनके ब्लड कॉलेस्ट्रॉल में करीब 7% की कमी दर्ज की गई। एक केस ऐसा भी सामने आया जिसमें 27 साल के एक युवक के लिवर पर बुरा असर पड़ा इस केस में कोई बात पुख्ता तरीके से साबित नहीं हो पाई क्योंकि वो कई और तरह के सप्लीमेंट ले रहा था और डॉक्टरों को ये भी अंदेशा था कि वो स्टेरॉइड भी ले चुका था।

ऐसे लोगों को व्हे प्रोटीन नुकसान पहुंचा सकता है, जिनको पहले से लीवर से जुड़ी कोई बीमारी है। cirrhosis एक ऐसी बीमारी होती है, जिसकी वजह से लीवर ठीक से काम नहीं कर पाता। ऐसे में ज्यादा प्रोटीन लेने पर खून में अमोनिया का लेवल बढ़ जाता है और इसकी वजह से दिमाग डैमेज हो सकता है। अगर आपको लिवर से जुड़ी कोई भी बीमारी है तो व्हे प्रोटीन यूज करने से पहले डॉक्टर से बात करें।

क्या इससे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हो सकता है

व्हे प्रोटीन और हड्डियों की बीमारी को लेकर भी इन दिनों काफी खबरें सुनने को मिल रही हैं। अगर बॉडी में बहुत ज्यादा प्रोटीन होता है तो हड्डियों से कैल्शियम कम होने लगता है और वो खोखली होने लगती हैं। मतलब ये कि जरा सा झटका और हड्डी गई काम से। (रिसर्च 6) 

ये बात यहां से सामने आई कि जो लोग ज्यादा प्रोटीन लेते हैं उनके पेशाब में यूरिक एसिड ज्यादा होता है। बॉडी में यूरिक एसिड ज्यादा होता है तो बॉडी उसके इफेक्ट को कम करने के लिए कैल्शियम रिलीज करने लगती है और ये कैल्शियम हड्डियों से ही तो आता है।

लेकिन वहीं दूसरी ऐसी रिसर्च भी सामने आ गईं कि प्रोटीन लेने से हड्डियों को कोई नुकसान नहीं होता। बल्कि बुजुर्गों को व्हे प्रोटीन लेने की सलाह दी जाती है ताकि उनकी हड्डियां मजबूत रहें।

क्या इससे किडनी खराब हो सकती है ?

ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी के भीतर प्रैशर बढ़ जाता है। इसकी वजह से उन्हें सामान्य के मुकाबले ज्यादा ब्लड फिल्टर करना पड़ता है। 
इस बारे में की गई कुछ रिसर्च कहती हैं कि ये हमारी बॉडी का नॉर्मल रेस्पांस है और कोई चिंता की बात नहीं है। अभी तक ऐसा कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है कि ज्यादा प्रोटीन से किडनी खराब हो जाती है।
इस तरह की भी रिसर्च सामने आई हैं कि जिन लोगों में किडनी की प्रॉबलम पहले से है या पैदा हो गई है उस दिक्कत को ज्यादा प्रोटीन और बिगाड़ देता है।  (रिसर्च 7)
यहां एक बात मैं जरूर कहना चाहूंगा कि कई रिसर्च मार्केट के दबाव में आकर की जाती हैं इसलिए इन रिसर्च पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए। अपना दिमाग जरूर लगाएं। हम अपने किसी भी अंग पर जरूरत से ज्यादा लोड नहीं डाल सकते। अगर हम ऐसा करेंगे जो आज नहीं तो कल रिएक्ट जरूर करेगा।
अगर आप लंबे समय से बॉडी बिल्डिंग कर रहे हैं तो हर छह महीने पर अपना किडनी फंक्शन टेस्ट तो जरूर कराते रहें और पानी की मात्रा कभी कम न होनें दें। अगर सही समय पर पता चल जाए तो किडनी को बचाया जा सकता है।

हमें कितना व्हे प्रोटीन लेना चाहिए

आपकी जो भी जरूरत है उसका ज्यादा से ज्यादा 40% हिस्सा व्हे प्रोटीन से आना चाहिए। इसके बाद प्रोटीन की बाकी जरूरत को हमें डाइट से पूरा करना चाहिए। अगर व्हे प्रोटीन ले रहे हैं तो दिन में कम से कम चार से छह लीटर पानी पीना चाहिए। सलाद लेना चाहिए और समय समय पर लीवर, किडनी और हड्डियों में कैल्शियम की जांच कराते रहना चाहिए।

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बीच-बीच में एक या दो दिन का गैप देते चलें। चार से छह महीने में एक बार 15 से 20 दिन का गैप जरूर देना चाहिए। अगर आपने अपना टारगेट पूरा कर लिया है तो जल्द से जल्द पूरी तरह से नेचुलर डाइट पर आ जाना चाहिए। बॉडी मेनटेन करने के लिए व्हे प्रोटीन बहुत जरूरी नहीं है। ध्यान रखें से बात मैं प्रोफेशनल बॉडी बिल्डर्स के लिए नहीं कह रहा हूं। उनकी जरूरतें अलग होती हैं।

व्हे प्रोटीन है तो कमाल की चीज मगर इसका ये मतलब कतई नहीं है कि हम बिना ब्रेक ताउम्र इसे पीते रहें। इसे डाइजेस्ट करने में हमारी बॉडी को नॉर्मल फूड के मुकाबले कहीं ज्यादा मेहनत करती पड़ती है। ये प्रोटीन की कॉन्संट्रेटेड फॉर्म होती है। बहुत सारा खाना खाने के बाद हमें जो कुछ मिलता है उसे विज्ञान ने एक स्कूप में समेट कर रख दिया है।

अगर हमेशा शब्द की परिभाषा को थोड़ा सा बदल दें तो हम हां कह सकते हैं लेकिन अगर हमेशा से आपका मतलब है सालों साल, हर दिन तो जवाब होगा ना। मेरे भाई हर दिन तो हमें सामान्य खाना भी नहीं खाना चाहिए, उसके बारे में नियम यही है कि बीच-बीच में उपवास रखना चाहिए।
व्हे प्रोटीन के साथ ये बात कमाल की है कि एक छोटे से स्कूप में हमें करीब 30 ग्राम वेज प्रोटीन मिल जाता है।

Bottom Line 

व्हे प्रोटीन पूरी उम्र लेने वाली चीज नहीं है। इसे डाइजेस्ट करने में हमारे लिवर को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। हम जब भी कांस्ट्रेटेड फूड लेते हैं तो उसका सारा लोड हमारे लिवर और किडनी पर जाता है। प्रोटीन पाउडर के साथ भी ऐसा ही है। अल्टीमेटली देखें तो प्रोटीन पाउडर है क्या, ये एक तरह का सूखा कैमिकल ही तो है। इससे हमें भरपूर अमीनो एसिड मिलता है, अमीनो एसिड से ही मसल्स बनते हैं, मगर ये न भूलें कि इसके आखिर में एसिड लिखा है।

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