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15 तरीकों से बढ़ाएं रनिंग स्टैमिना और स्पीड

हरियाणा के गांवों की सड़कें हों या बनारस की रोड, सुबह के वक्त सैकड़ों युवा दौड़ लगाते दिखते हैं। ये लोग भर्ती की तैयारी कर रहे होते हैं। 100 मीटर, 400 मीटर या 1600 मीटर- सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के फिजिकल में आमतौर पर यही रेस होती हैं। बहुत से युवा कई बार कोशिश के बावजूद सही टाइम पर दौड़ खत्म नहीं कर पाते। वजह होती है रनिंग स्टैमिना और स्पीड में कमी। कई बार बहुत प्रैक्टिस करने के बावजूद रफ्तार नहीं बढ़ पाती। ऐसे में हमें विज्ञान को साथ लेकर चलना होगा। आंख मूंद कर रोज सड़क पर रनिंग करने से काम नहीं चलेगा। मसल्स की मजबूती, खुराक और ट्रेनिंग करने के वैज्ञानिक तरीके की बदौलत हम रनिंग स्टैमिना और स्पीड बढ़ा सकते हैं। हम इनपर एक-एक करके बात करेंगे। सबसे पहले हम ट्रेनिंग करने के तरीके पर बात करते हैं।

रनिंग स्टैमिना और स्पीड कैसे बढ़ाएं – How to increase running speed and stamina

1 धीमी शुरुआत करें : प्रैक्टिस के दौरान, शुरू में 15 मिनट तक सामान्य रफ्तार से दौड़ें। आपके दिल की धड़कन बढ़नी चाहिए मगर जरूरत से ज्यादा नहीं। इन 15 मिनट में अपनी क्षमता से 20 से 30% रफ्तार से ही दौड़ना है उससे ज्यादा नहीं। आप इन 15 मिनट में अपनी बॉडी को ज्यादा ऑक्सीजन लेने के लिए तैयार कर रहे होते हैं।

2 इंटरवल ट्रेनिंग के जरिए रफ्तार सुधारें : इंटरवल ट्रेनिंग आपकी बॉडी को ये सिखाती है कि ऑक्सीजन का बेहतर तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। वार्म अप करने के बाद एक मिनट अपनी पूरी जान लगाकर दौड़ें। इसके बाद दो मिनट तक वॉक करें ताकि आपके मसल्स कूल डाउन हो सकें।

हुत से युवा कई बार कोशिश के बावजूद सही टाइम पर दौड़ खत्म नहीं कर पाते। वजह होती है रनिंग स्टैमिना और स्पीड में कमी। कई बार बहुत प्रैक्टिस करने के बावजूद रफ्तार नहीं बढ़ पाती। ऐसे में हमें विज्ञान को साथ लेकर चलना होगा।

3 उस एक मिनट के दौरान अपनी पूरी जान लगा लें। ये ट्रेनिंग तभी काम आएगी जब आप उस एक मिनट में खुद को पूरा छोंक देंगे। इसे कहते हैं – anaerobic zone में जाना यानी वो स्टेज जहां आप सांस लेने के लिए तड़प उठें। अपने साथ इस बात की व्यवस्था रखें कि आप ठीक एक मिनट तक दौड़ें और ठीक दो मिनट तक रेस्ट करें। टाइमर वाली खड़ी, फोन अलार्म या अलार्म वाली स्टॉप वॉच का यूज करें। किसी को साथ ले सकते हैं। जो आपके सामने की ओर दूर खड़ा हो और जैसे ही एक मिनट बीते इशारा कर दे।

4 इसे चार बार दोहराएं : जैसी इंटरवल ट्रेनिंग आपको बताई गई है उसे कुल चार बार दोहराएं। इसमें 12 मिनट का वक्त लगेगा, जोकि मेरी समझ से बहुत ज्यादा तो नहीं है। मगर 12 मिनट खत्म होने के बाद आप पूरी तरह निचुड़ जाएंगे और होना भी यही चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो इसका मतलब आप अपने आप को धकेल नहीं रहे हैं, अपनी सीमाओं में बंधे हुए हैं। इस प्रोसेस को दोहराना जरूरी है। इससे आपकी बॉडी में ज्यादा से ज्याद ऑक्सीजन पहुंचेगी। धीरे-धीरे आपके ब्लड की ऑक्सीजन को सोखने की क्षमता बढ़ जाएगी। जितनी ज्यादा ऑक्सीजन आपका ब्लड सोख पाएगा उतना ही तेज आप दौड़ पाएंगे। यही है इंटरवल ट्रेनिंग का साइंस।

5 ठंडे हो जाएं – इंटरवल ट्रेनिंग हो गई। अब पांच मिनट तक आराम से वॉक करें। धीरे-धीरे आपके दिल की धड़कन सामान्य होती जाएगी। आप अच्छे खासे थक भी चुके होंगे। अगर अब भी सांसे चढ़ी हुई हों तो थोड़ा झुक कर सांस लें। इससे आराम पड़ता है।

6 सप्ताह में कम से कम बार और अधिक से अधिक दो बार – इंटरवल ट्रेनिंग बहुत कारगर होती है और बहुत हार्ड भी होती है, इसलिए इसे सप्ताह में कम से कम बार जरूर करें मगर 10 दिन में दो बार से ज्यादा ना करें। इसमें मसल्स इंजरी की गुंजाइश भी होती है। कुछ सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद इंटरवल ट्रेनिंग को और कठिन बनाएं।

7 कूल डाउन का टाइम कम करें – अब इंटरवल ट्रेनिंग को और कठिन बनाने का वक्त आ गया है। एक महीने की ट्रेनिंग के बाद अब इंटरवल ट्रेनिंग को और हार्ड बनाएं। एक मिनट की तेज रनिंग के बाद दो मिनट के रेस्ट की बजाए, एक मिनट कर रेस्ट करें। अगर शुरू में इसमें बहुत दिक्कत हो रही है। पहले कूल डाडन के दो मिनट में आधा मिनट कम करें, जब यहां आप मैनेज कर पाएं तो फिर आधा मिनट और कम कर दें। यानी एक मिनट की रनिंग और एक मिनट का कूल डाउन।

8 पांच मिनट और बढ़ाएं – जिस दिन आप इंटरवल ट्रेनिंग नहीं करते उस दिन रुटीन रनिंग तो करते ही होंगे। अब उसमें हर सप्ताह पांच मिनट बढ़ाते जाएं। इससे धीरे-धीरे आपकी कैपेसिटी बढ़ती चली जाएगी। अगर पांच मिनट ज्यादा लगते हों तो हर सप्ताह एक-एक मिनट का समय बढ़ाएं।

9 देखें आपने क्या हासिल किया – यह देखना बहुत जरूरी है कि हम ट्रेनिंग से क्या हासिल कर रहे हैं। इसलिए अपने पाए एक कॉपी जरूर रखें और उसमें अपनी प्रोग्रेस नोट करें। अपना टाइम नोट करें। अपना एक्सपीरियंस नोट करें। टाइम नोट करने के अलवा अपनी क्षमता नोट करने का एक तरीका ये भी है कि अपनी पूरी ताकत से आप जितना दौड़ सकते हैं, दौड़ें और टाइम व दूरी नोट कर लें। हर दस दिन में ऐसा ही करें। आपको पता चल जाएगा कि आप आगे की ओर जा रहे हैं पीछे की ओर।

11 ब्रेक लें – मान लो आप 1600 मीटर की रेस की तैयारी कर रहे हैं तो ये कतई जरूरी नहीं है कि आप रोज 1600 मीटर दौड़ें। आप उससे ज्यादा या कम भी दौड़ सकते हैं। ट्रेनिंग का मकसद खुद को तैयार करना है। हर दिन खुद को 1600 मीटर के टाइम जोन न झोंकें।

12 स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें – अपने वर्कआउट में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को जोड़ें। इसका मतलब हुआ ताकत बटोरना। जिम जा सकते हैं तो जाएं। Squats, Lunges, Barbell shoulder Press, Box jumps, pull ups, dead lifts जैसी कसतरों से ताकत बढ़ती है। ये भी जरूरी हैं। सप्ताह में दो दिन आप जिम जाएं। पहले थोड़ी रनिंग करें और उसके बाद स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें। आपके मसल्स जितने ताकतवर होंगे उतना अच्छा है।

13 विटामिन डी का टेस्ट कराएं – एक बार अपना विटामिन डी टेस्ट जरूर करा लें। इसकी कमी बड़े पैमाने पर युवाओं में पाई जाती है। अगर आपकी बॉडी में विटामिन डी कम है तो यह ठीक नहीं है। डॉक्टर से बात करके इसकी खुराक तय करा लें। आमतौर पर सप्ताह में एक दिन एक गोली लेनी होती है। इसके अलावा हड्डियों के कैल्शियम का टैस्ट भी कराके रखें। अगर कम है तो डॉक्टर से बात कर कैल्शियम सप्लीमेंट शुरू कर सकते हैँ।

14 डाइट इंप्रूव करें – ये वो प्वाइंट है जहां अक्सर युवा गड़बड़ करते हैं। वो मेहनत ज्यादा करते हैं मगर न्यूट्रीशन नहीं लेते। रनिंग के लिए बहुत स्टैमिना, स्ट्रेंथ और कैलोरी की जरूरत होती है। ये बात कान खोल कर सुन लें, अगर आपकी डाइट अच्छी नहीं है तो आप कितनी ही प्रैक्टिस कर लें, सफल होने के चांस बहुत कम हैं। चोट लगने का किसी तरह की परमानेंट इंजरी होने के चांस बहुत ज्यादा हैं।

आपको हर दिन अपने बॉडी वेट के एक किलो पर एक से डेढ़ ग्राम प्रोटीन लेना हो। यानी अगर आप 70 किलो के हैं तो आपको 140 ग्राम तक प्रोटीन खाना ही होगा। प्रोटीन से आपके मसल्स बनते हैं। अंडे, चिकन, राजमा, सफेद चने, पनीर, सोयाबीन, दूध, छाछ, आलू, केले ये सब आपकी डाइट का हिस्सा होने चाहिए।

15 पानी बढ़ाएं – कई बार केवल पानी की कमी के चलते हम हांफने लगते हैं। ये भी बड़े काम की बात है। अगर बॉडी में पानी कम है तो डाइट और प्रैक्टिस भी आपका भला नहीं करा सकती आप बहुत जल्दी हांफने लगेंगे। सुबह उठते ही दो गिलास पानी जरूर पिया करें। दिनभर में तीन से चार लीटर पानी पिएं।

Bottom line 

दौड़ लगाने का स्टैमिना बनाने के लिए आपको ट्रेनिंग के साथ-साथ अपनी डाइट पर भी फोकस करना होगा। आपको उम्दा डाइट लेनी होगी, जिसमें ढेर सारा कार्ब और प्रोटीन हो। आपको अपने बॉडी के एक किलो पर कम से कम एक ग्राम प्रोटीन तो लेना ही होगा। इससे आपके मसल्स मजबूत होंगे। रनिंग से पहले आपकी बॉडी में पानी होना चाहिए। कई बार केवल पानी की कमी के चलते लोग हांफने लगते हैं। ये बहुत बड़ी वजह है स्टैमिना कम होने की। देखिए अच्छी खुराक होगी तभी इंजन दौड़ेगा। अपनी डाइट में घी वगैरह भी शामिल कर सकते हैं। एक दो केलों या एक दो गिलास दूध से काम नहीं चलने वाला।

Toyaz Kumar Singh

Toyaz Kumar Singh is a fitness and nutrition expert. He Holds a master’s degree in Yoga too. You may contact him at – bodylabindia@gmail.com

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