छुअन का साइंस, जैसा दोगे वैसा पाओगे

वाह इसकी त्‍वचा कितनी सॉफ्ट है। क्‍या कभी आपने किसी को छूने के बाद यह बात महसूस की है कि उसकी स्‍किन बेहद सॉफ्ट है? छुअन और बेहतरीन अहसास की हकीकत को कुछ शोधकर्ताओं ने सामने लाने की कोशिश की है। उनका कहना है कि कई बार ये एक्‍सपीरियंस महज एक कल्‍पना हो सकती है।

to touch is to feel.
According to researchers when it comes to touch, to give is to receive. Image courtesy : Pixabay

हाल ही में हुए एक अध्‍ययन में हिस्‍सा लेने वाले लोगों ने दूसरे की स्‍किन को अपनी स्‍किन से ज्‍यादा मुलायम बताया, चाहे वो मुलायम हो या नहीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि छू कर रिश्‍ते कायम करने की इंसानी आदत इसके पीछे एक वजह हो सकती है। आपने ध्‍यान दिया होगा, हम जब भी किसी पवित्र वस्‍तु को देखते हों तो उसे छू कर हमें बडी शांति मिलती है, किसी खूबसूरत फूल को छू कर हमें अच्‍छा लगता है। यह हमारा नेचर है। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एंजे जेंश कहते हैं कि हमने रिसर्च में पाया कि जब बात छूने की आती है तो हमारी कल्‍पना इसमें बहुत बड़ा रोल प्‍ले करती है। रिसर्च से जुड़े एक अन्‍य वैज्ञानिक ने कहा कि जहां तक छुअन की बात है तो ऐसा करने में हम खुद को सुख दे रहे होते हैं। कहने का मतलब ये है कि हम खुद भीतर से यह चाहते हैं कि हमें कैसा टच आनंदित करेगा और अक्‍सर हम वैसा ही महसूस करते हैं।
सच ये है कि हमारी जिंदगी में बचपन से लेकर बुढ़ापे तक टच एक शक्‍ितशाली रोल अदा करता है। यह शारीरिक और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के अच्‍छा होता है। इस सिलसिले में हुए कई अध्‍ययनों ने छूने वाले को छुअन से मिलने वाले लाभ की बात को सामने रखा है। उदाहरण के लिए अगर किसी बच्‍चे का जन्‍म समय से पहले हो जाए तो उस बच्‍चे को अपनी मां के शरीर से चिपका रहना बहुत फायदा पहुंचाता है। चिपका रहने से मतलब है प्रत्‍यक्ष शारीरिक स्‍पर्श। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि छूने से जो मानसिक लाभ मिलता है उसके बारे में अभी बहुत कुछ जानना बाकी है। इससे पहले हुए शोध बताते हैं कि किसी नर्म चीज को छूने से दिमाग का वो हिस्‍सा एक्‍टीवेट होता है जो भावनाओं और पुरस्‍कार के जुड़ा होता है। इसलिए यह भ्रम होना कि दूसरे की स्‍किन आपसे ज्‍यादा सॉफ्ट है और उसे छूना अपने आप में एक पुरस्‍कार पाने जैसी फीलिंग दिलाता है।

स्रोत – सेल प्रेस

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