ध्यान आखिर कैसे लगाया जाता है

ध्‍यान लगाया नहीं जाता वो अपने आप लगता है। यह अवस्‍था यूं ही हासिल नहीं होती।
ध्‍यान कैसे लगाया जाता है।

अगर कोई कहे कि वो ध्यान लगाने जा रहा है या ध्यान लगाकर आ रहा है तो 99.99 फीसदी यह मानकर चलें कि वह झूठ बोल रहा है। अगर कोई आपको ध्यान लगवाने का ऑफर दे तो वह 100 फीसदी झूठ बोल रहा है। पहले वाले वाक्य में हमने .1 फीसदी की गुंजाइश इसलिए छोड़ दी क्योंकि हो सकता है आपकी बात किसी सच्चे योगी से हो रही हो। ध्यान लगवाने वाली बात सौ फीसदी गलत इसलिए है क्योंकि कोई सच्चा योगी इस तरह की बात कहेगा ही नहीं। ध्यान किया नहीं जाता हो जाता है। यह बहुत ऊंचे दर्जे की स्थिति है।
पतंजलि के अष्टांग योग – यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि में ध्यान का स्थान सातवां हैं। आपको इसी बात से अंदाजा लगा लेना चाहिए कि योग में इसका क्या स्थान है।

क्या भीतर और बाहर तमाम तरह के संघर्षों में जुटे आज के इंसान के लिए इसे पा लेना इतना आसान है। क्या हमारा शरीर इतना फिट है कि वह ध्यान तक पहुंचाने का रास्ता बना पाए या ध्यान से हासिल होने वाली अनूभूतियों को झेल तक पाए।
ध्यान लगाया नहीं जाता। यह खुद लगता है। हम उसकी तैयारी भर कर सकते हैं। इंसान को यह पता ही नहीं चलता कि वह कब ध्यान में गया। हम केवल उस अवस्था से लौटने के बाद मिले संकतों से यह अंदाजा लगाते हैं कि हमने ध्यान लगाया था।

इसे एक उदाहरण के समझें। क्या आप बता सकते हैं कि बीती रात आपको कितने बजे नींद आई। आप बिस्तर पर जाने का समय तो बता सकते हैं मगर नींद आने का समय नहीं बता सकते। हम केवल सोने की तैयारी करती है। हम भोजन करते हैं, टहलते हैं, संगीत सुनते हैं, बिस्तर ठीक करते हैं, अंधेरा करते हैं या पढ़ते हैं। हम वो सब तैयारियां करते हैं, जिनसे हमें नींद आए, मगर नींद खुद आती है।
हमें अच्छी आई इसका अंदाजा हम कैसे लगाते हैं? दो चीजें हमें इस बात का संकेत देती हैं। पहला हमारा चित्त जो कभी नहीं सोता। वो हमें इशारा देता है कि रात अच्छी गुजरी। दूसरा हमारे मसल्स, वो अगर सुबह रिलैक्स हैं तो हम कहते हैं कि नींद अच्छी आई।

ध्यान को भी आप नींद के माध्यम से समझ सकते हैं। हम यम, नियम, आसान, प्राणायाम वगैरा के जरिए अपने शरीर और मन को ध्यान के लिए तैयार करते हैं। हम ध्यान में बैठते हैं और उसके बाद ध्यान खुद लगता या नहीं लगता है।

तो हम कैसे पहचानेंगे कि ध्यान लगा है? इसके कई इशारे हैं मगर एक बड़ा ही स्पष्ट है और वो है आचरण व व्यवहार में बदलाव। अगर हमारे व्यवहार में बदलाव नहीं आ रहा तो आपने आंखें मूंद कर कितना ही समय बिता लिया हो आप ध्यान में नहीं गए।
ध्यान के नाम पर दुकानों में अंधेरा और एकांत बिक रहा है। शारीरिक और मानसिक परेशानियों से जूझ रहे शख्स की भावनाओं से खिलवाड़ कर लोग ध्यान का धंधा कर रहे हैं।

योग की परंपरा को दो तीन घंटे के सेशन में समेटने का सामर्थ किसी में नहीं है। आप आसन कर सकते हैं, आप षटकर्म कर सकते हैं पर ध्यान बहुत बहुत ऊंचे दर्जे की स्थिति है। पढ़ें समझें जानें और फिर इस दिशा में आगे बढ़ें। नहीं तो थोड़े ही वक्त बाद आपका धैर्य खत्म हो जाएगा और इसका दोष आप योग को देंगे।

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3 comments

  1. Main bhi dhyaan karna chahta ho please helpme.

  2. shiv kumar saini

    Dear sir mera wait 65 kilo hi aur hight 5.1ft hai kamar 32 inch hai kaya ma bulk body banane ke liye mass gainer Le sakta hu wo konsi company ka Lu

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