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चीन के प्लास्टिक वाले चावल पर हाईकोर्ट ने जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि चीन से आ रहे प्लास्टिक वाले चावल को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है। इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात रखी गई थी कि मुनाफा कमाने के फेर में दुकानदार चीन के चावल को असली चावल में मिला कर बेच रहे हैं। इसकी पहचान करना बहुत मुश्किल होता है। इसे खाने से पेट की कई बीमारियां पैदा हो रही हैं।

केवल दिल्‍ली में नहीं कई जगह बिक रहा है चीनी चावल

चंद रुपयों के लालच में मिलावटखोर व्‍यापारी आपकी जान से खेल रहे हैं। असली चावल में चीन से आया प्‍लास्‍टिक वाला चावल मिलाकर दिल्‍ली के बाजारों मे बेचा जा रहा है। ऐसा सिर्फ दिल्‍ली में नहीं हुआ, इससे पहले मार्च में केरल के अखबारों में चीनी चावल की खबरें छपी थीं और इससे भी पहले सिंगापुर, वियतनाम जैसे देशों में यह बात सामने आ चुकी है। हर जगह चीन का नाम ही सामने आ रहा है।
कैसे बनता है यह – बिल्कुल सही जानकारी तो हासिल नहीं हो पाई मगर कहा जाता है कि यह चावल आलू, शकरकंद और प्लास्टिक को मिलाकर बनाया जाता है। यू ट्यूब पर कुछ वीडियो हैं, जिनमें दिखाया जा रहा है नकली चावल कैसे बनता है मगर यह वीडियो कितने सच्चे हैं कहना मुश्किल है।

कैसे पहचानें प्‍लास्‍टिक वाला चावल

1 नकली चावल देखने में काफी चमकीला नजर आता है।
2 अगर दो तरह के नकली चावलों को आपस में मिलाया नहीं गया है तो सारे चावलों का आकार और मोटाई एक जैसी होगी।
3 तौल कर लेंगे तो असली चावल के मुकाबले यह कुछ ज्यादा मिलेगा क्योंकि इसका वजन हल्का होता है।
4 असली चावल में धान की भूसी मिल ही जाती है, नकली में नहीं।
5 पकते वक्त इसे सूंघने पर आपको अंतर पता लग सकता है। यह प्लास्टिक की तरह ही महकता है।
6 काफी देर पकाने के बाद भी यह ठीक से पकता नहीं है।
8 इस चावल के माड (पकने के बाद बचा चावल का पानी) पर सफेद रंग की परत जम जाती है।
9 अगर इस परत को धूप में रख दिया जाए तो ये प्लास्टिक बन जाएगी, जिसे जलाया जा सकता है।
10 यह चावल पानी में तैरता नहीं है क्‍योंकि यह सौ फीसदी प्‍लास्‍टिक नहीं होता इसमें आलू और शकरकंद भी मिला होता है।

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