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आखिर क्या है इस मसाला मैगी का सारा माजरा

मैगी को लेकर इन दिनों जबरदस्त हो हल्ला मचा है। इसकी शुरुआत यूपी से हुई। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्‍ट्रेशन (लखनऊ) ने मैगी के कुछ नमूने लिए और उन्हें जांच के लिए कोलकाता की लैब में भेजा गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मैगी में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) और लेड (सीसा) की मात्रा तय मात्रा से ज्यादा पाई गई। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इन नमूनों में सीसा की मात्रा 0.01 से लेकर 2.5 पीपीएम की तय मात्रा के मुकाबले 17.2 पीपीएम पाई गई। बस इसी रिपोर्ट से शुरू हुआ मैगी की जांच का अभियान।
इस घटना के बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने सभी राज्य सरकारों को मैगी की जांच कराने का आदेश दिया। दिल्ली सरकार ने जांच के लिए कुल 13 सैंपल लिए थे, जिनमें से 10 फेल हो गए। दिल्ली सरकार का कहना है कि नूडल्स में कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई, दिक्कत मसाले में है।

क्या कहती है नेस्ले कंपनी
मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले का कहना है कि उन्होंने भी विश्वस्तरीय लैबों में इसकी जांच कराई है और मैगी में कोई नुकसान करने वाली चीज नहीं है। महाराष्ट्र सरकार ने भी इसे क्लीन चिट दे दी है।

हमें क्यूं परेशान होना चाहिए
अगर सरकारी रिपोर्ट सही हैं तो यकीनन हमें परेशान होना चाहिए क्योंकि ज्यादा लेड और ज्यादा एमएसजी दोनों बहुत खतरनाक हैं।

क्या है एमएसजी
मोनोसोडियम ग्लूटामेट खाने पीने की तमाम चीजों में खुद ब खुद मौजूद होता है। यह हमारे शरीर में भी बनता है। इसका इस्तेमाल पैकेट वाले खाने का स्वाद बढ़ाने और उसे खराब होने से बचाए रखने के लिए किया जाता है। खाने पीने की चीजों में 0.01 पीपीएम के आसपास एमएसजी का इस्तेमाल किया जा सकता है, इससे ज्यादा नहीं।

ज्यादा एमएसजी से नुकसान
यह एक किस्म का सॉल्ट होता है इसमें सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है। इसका सीधा असर ब्‍लड प्रेशर पर पड़ता है। मोटे तौर पर एमएसजी से हाई बीपी, सिर दर्द की शिकायत हो सकती है। लगातार बढ़ी मात्रा शरीर में जाने से सिर दर्द माइग्रेन में तब्दील हो सकता है। इसके अलावा यह दिल और किडनी के लिए भी खतरनाक है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इन सबके अलावा यह स्‍वाद को महसूस करने वाली ग्रंथियों की ताकत को कम कर देता है और अपने स्‍वाद का आदी बनाता है।

लेड (सीसा) क्यूं खतरनाक है
लेड न तो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है और न ही हमारा शरीर इसे एक्सेप्ट करता है। प्रदूषण या मिलावट के जरिए ये हमारे शरीर में पहुंचता है और धीरे धीरे इकट्ठा होता रहता है। अगर यह शरीर में जमा होता रहा तो यह दिमाग, लीवर, किडनी और हड्डियों तक पहुंच कर उन्हें भारी नुकसान पहुंचा सकता है। लेड अपना असर दिखाने में वक्त लेता है। धीरे धीरे लीवर में जमा होने के बाद यह लीवर के सेल्स को मारने लगता है। इसके चलते एक तो हमारे लीवर में खराब हो चुके सेल्स पड़े रह जाते हैं और दूसरा हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। लेड हमारे नर्वस सिस्टम में भी पहुंच जाता है। साफ शब्दों में कहें तो सीसा हमारे शरीर के करीब करीब हर अंग को नुकसान पहुंचाता है।

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